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ब्राह्मण एक कर्म नही धर्म है

ब्राह्मण रूठ तो परशुराम भूख तो सुदामा ब्राह्मण घमंडी तो रावण ब्राह्मण ब्राह्मण  ( विप्र, द्विज, द्विजोत्तम, भूसुर ) हिन्दू समाज की एकजाति है | ब्राह्मण को विद्वान, सभ्य और शिष्ट माना जाता है।एतिहासिक रूप से हिन्दू समाज में, व्यवसाय-आधारित चार वर्णहोते हैं।  ब्राह्मण  ( आध्यात्मिकता के लिए उत्तरदायी ),  क्षत्रिय (धर्म रक्षक),  वैश्य  (व्यापारी व कॄषक वर्ग) तथा  शूद्र  ( शिल्पी,श्रमिक समाज ) । व्यक्ति की विशेषता, आचरण एवं स्वभाव सेउसकी जाति निर्धारित होती थी । विद्वान, शिक्षक, पंडित,बुद्धिजीवी, वैज्ञानिक तथा ज्ञान-अन्वेषी ब्राह्मणों की श्रेणी मेंआते थे | यस्क मुनि की निरुक्त के अनुसार...